Zobox: पुराने मोबाइल को बनाएं नया, वो भी आधी कीमत में
अगर आप किफायती दाम पर एक भरोसेमंद मोबाइल खरीदना चाहते हैं, तो दिल्ली आधारित स्टार्टअप Zobox आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। यह कंपनी पुराने मोबाइल फोन्स को नया जैसा बनाकर, यानी रीफर्बिश करके, बाजार में बेचती है — और वह भी लगभग आधी कीमत पर।
शुरुआत और उद्देश्य
Zobox की शुरुआत साल 2020 में हुई थी। इसके संस्थापक हैं नीरज चोपड़ा, और उनके साथ को-फाउंडर के रूप में जुड़े हैं विवेक बंसल और नवीन गौड़। नीरज का पालन-पोषण हांगकांग में हुआ और उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री का अच्छा अनुभव है। भारत लौटने के बाद उन्होंने तय किया कि इस सेक्टर में कुछ नया और उपयोगी किया जाए — जिससे पर्यावरण की भी रक्षा हो और लोगों को किफायती डिवाइस भी मिलें।
उनका मिशन है – ई-वेस्ट को कम करना और हाई-क्वालिटी रीफर्बिश्ड मोबाइल्स को सस्ते दाम में उपलब्ध कराना।
Zobox का बिजनेस मॉडल
Zobox एक B2B और B2C मॉडल पर काम करता है। इसका मतलब है कि यह कंपनी सीधे ग्राहकों को भी मोबाइल बेचती है और छोटे व्यापारियों को भी सप्लाई देती है।
उनके प्रोडक्ट्स में Apple, Samsung और Google जैसे टॉप ब्रांड्स के फोन शामिल हैं, जिन्हें अच्छी तरह से टेस्ट कर के फिर से बाजार में उतारा जाता है।
ई-वेस्ट की समस्या और समाधान
नीरज बताते हैं कि भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा ई-वेस्ट उत्पादक देश है। हर साल करोड़ों टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक है। Zobox का लक्ष्य इसी समस्या से लड़ना है।
रीफर्बिशिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स की उम्र बढ़ती है, जिससे नए प्रोडक्ट्स की मांग कम होती है और ई-वेस्ट भी घटता है। इसके साथ ही Zobox, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए रिसाइक्लिंग फैक्ट्री लगाने की योजना पर भी काम कर रहा है।
Zobox की खासियत – ZRP टेक्नोलॉजी
Zobox ने एक खास प्लेटफ़ॉर्म बनाया है — ZRP (Zobox Rated Phones)। इसके जरिए फोन की क्वालिटी और परफॉर्मेंस का रेटिंग सिस्टम तैयार किया गया है, ताकि कोई भी रिटेलर या ग्राहक धोखे का शिकार न हो।
इस टेक्नोलॉजी की मदद से खासकर छोटे शहरों में दुकानदार भरोसे के साथ फोन खरीद और बेच सकते हैं। इससे टियर II, III और IV शहरों में Zobox की मजबूत पकड़ बन रही है।
अब तक की ग्रोथ और भविष्य की योजनाएं
Zobox अभी तक पूरी तरह से बूटस्ट्रैप्ड है। नीरज ने इसमें अपनी ओर से करीब 80 लाख रुपये का निवेश किया है। अब कंपनी का लक्ष्य है कि वह आने वाले साल में 50 करोड़ रुपये तक का रेवेन्यू हासिल करे।
भविष्य में Zobox देशभर में अपने Zo Hubs और Zo Army नाम से एक नेटवर्क बनाना चाहता है — जिससे ग्रामीण इलाकों में कम से कम 50,000 लोगों को रोजगार मिल सके।
साथ ही, लैपटॉप के रीफर्बिशिंग और रिसर्च में भी कंपनी अपने कदम बढ़ा रही है, जिससे टेक्नोलॉजी का अधिकतम और टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।